बुधवार, 11 दिसंबर 2013

दानवीय चेहरा ही समलैंगिकता है

हम सबके अपने अपने शौक़ होते हैं...जिन्हें करने में एक अजीब तरह की मानसिक शान्ति मिलती है...एक सुकून, की ये मैंने ख़ुद के लिए किया है। लेकिन अपने शौक़ के साथ वक्त बिताने का मतलब यह कतई नहीं कि हम सही हैं और बाकि अन्य गलत या दूसरे हमसे रत्तीभर भी कम समझदार हैं या हम पूर्णरूप से गलत नहीं हैं 

हमें एक बार एक आदमी मिला था उसने बताया कि वह जिन्दा छिपकली को पकड़कर खा जाता है। सुनकर काफी आश्चर्य हुआ लेकिन थोड़े दिनों बाद ही उस आदमी को एक टीवी शो वही कारनामा दोहराते हुए देखकर और भी ज्यादा हैरत लेकिन एंकर ने कहा था तुम जो यह कर रहे हो यह मानव के भीतर का दानवीय चेहरा है। ईश्वर या कहूं कि प्रकृति के बनाये नियमों के विपरीत चलना है दानव होना है तो गलत नहीं होगा।

खैर, मुद्दे पर आते हैं... आज समलैंगिकता पर जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया तो देश कि कई जानी मानी हस्तियां कह रही हैं कि अगर विदेशों में ऐसा सम्भव है तो यहाँ क्यों नहीं …… ऐसे दिवालियापन के शिकार लोगों पर कम शब्दों में कहें तो उनके भीतर का भी दानवीय चेहरा ही समलैंगिकता है तो गलत नहीं होगा ....

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