शुक्रवार, 8 मार्च 2013

नया नवेला सा हो जाता है हमारा प्यार

आज फिर मुझसे पूछती है बार बार 
कितने दिनों से तुमने पूछा ही नहीं 
मेरा हाल ?

अब तो याद भी नहीं
कब रूठी थी मैं 
और कब मनाया था तुमने बार-बार ?

अरसा गुजर गया,
जब मिलती थी मैं 
तो बाहें पसारे खड़े होते थे तुम हर बार।

बुझे मन से कहती है
नजदीकियों ने ही कर दिया है
हमारे प्यार को शायद बेराह।

पर वह जानती है
जितनी बार बेसलीका हुआ है प्यार
फिर से नया नवेला सा हो जाता है हमारा प्यार ...