उम्मीद, ....आसमान की परिधि से परे...ठीक वैसा ही जैसे आसमान को किसी सीमा में नहीं बांध सकते .... इस उम्मीद के दायरे को किसी सीमा में रख ही नहीं सकते....लेकिन फिर भी जैसे आसमान की उचाइयो को छूने की तम्मना हमारे दिलो में होती है..वैसा ही कुछ उम्मीदों के आसमान तक पहुचने की भी.....तो जब तक हमारे दायरे इसी प्रकार रहेंगे... ये 'उम्मीदों का आसमान भी ऐसा होगा.....आखिर हासिल जो करना है....उम्मीदों के आसमान.... को