मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013

प्रकृति में मौत

कभी देखे हो हमारे शहर को 
जहां इमारतें तो दिखती है 
पर आसमान नहीं दिखता 
तुम तारों की बात करते हो 
यहाँ तो सुबह रौशनी भी 
अब साफ साफ नहीं दिखती 
और शाम सूरज की लाली नहीं 
धुएं का गुबार लेकर आती है 

तुम भी आना मेरे शहर और देखना 
यहाँ की प्रकृति में मौत नजर आती है

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