कभी देखे हो हमारे शहर को
जहां इमारतें तो दिखती है
पर आसमान नहीं दिखता
तुम तारों की बात करते हो
यहाँ तो सुबह रौशनी भी
अब साफ साफ नहीं दिखती
और शाम सूरज की लाली नहीं
धुएं का गुबार लेकर आती है
तुम भी आना मेरे शहर और देखना
यहाँ की प्रकृति में मौत नजर आती है
जहां इमारतें तो दिखती है
पर आसमान नहीं दिखता
तुम तारों की बात करते हो
यहाँ तो सुबह रौशनी भी
अब साफ साफ नहीं दिखती
और शाम सूरज की लाली नहीं
धुएं का गुबार लेकर आती है
तुम भी आना मेरे शहर और देखना
यहाँ की प्रकृति में मौत नजर आती है
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