हर दिन दौड़ी हौले -हौले टेढ़ी -मेढ़ी यह जिन्दगी
खुद से दूर खड़ा कर पूछे किस्से कई यह जिन्दगी
कब छूटा था तेरा बचपन,
अहसास हुआ कब यौवन का
बता मुझे कब गलिया छोड़ी
जिसमे यादे बसती है
खेल-खिलौने, रिश्ते-नाते,
स्नेह-प्रेम सब क्यों खोया
यादों के इस गुलशन में तूने
क्या-क्या और कहा खोया
हर दिन खोते इस जीवन में
कहाँ, कही कुछ पाया है
जीवन की इस रीत में एक दिन
सब कुछ यही तो खो जायेगा
खुद से दूर खड़ा कर पूछे किस्से कई यह जिन्दगी
कब छूटा था तेरा बचपन,
अहसास हुआ कब यौवन का
बता मुझे कब गलिया छोड़ी
जिसमे यादे बसती है
खेल-खिलौने, रिश्ते-नाते,
स्नेह-प्रेम सब क्यों खोया
यादों के इस गुलशन में तूने
क्या-क्या और कहा खोया
हर दिन खोते इस जीवन में
कहाँ, कही कुछ पाया है
जीवन की इस रीत में एक दिन
सब कुछ यही तो खो जायेगा
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