गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

आज उससे तू दूर खड़ा

बड़ी प्यारी सी गजल थी तुम,
सपना नहीं एक हकीकत थी तुम.
गम तो कभी पाया ही नहीं तेरे से ,
फिर क्यों सब जुदा हो गए तेरे से.

...दामन में तो तेरे फूल ही फूल थे,
फिर आज क्यों वे कहते वहा शूल थे.
सब मांगते रहे और तू देता रहा,
सिर्फ ले के भी आज क्यों नहीं कुछ दे रहा.

रहने को तेरा आसरा तो था बड़ा,
पर आज क्यों ये वीरान है सुनसान है.
सब कुछ तो तेरे आँचल में था भरा,
क्यों 'प्रिय' फिर आज उससे तू दूर खड़ा.

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