शुक्रवार, 3 जून 2011

परशुराम यज्ञं

6 मई की शाम में घर (मोकामा) में था. फिर अपनों के प्रेम, स्नेह और आशीर्वाद का दौर शुरू. पूरे रस्ते और घर के आस - पास जो भी मिले सबो को प्रणाम करने का अनवरत सिलसिला..साथ ही कई स्नेही जानो से मुलाकात के बाद पूरे 71  दिनों बाद घर का खाना खा रहा था. बिजली देवता उस रात  मेहरवान थे इसलिए पूरी रात चैन से सोया. 
अगली सुबह परम आराध्य भगवान् परशुराम के दर्शन को गया...5  से  9  मई के बीच परशुराम यज्ञं होने के कारन वहा भीड़ कुछ जयादा ही थी. दर्शन, पूजा  उपरांत अपनी आदतों के तहत वहा की खामिया और खूबियों नजर दौराने लगा. 
मंदिर के विकाश के लिए परशुराम मंदिर विकास समिति के सदस्य बनने हेतु इच्छुक व्यक्ति अब 50  रूपये मासिक की दर सदस्यता शुल्क जमा कर वहा के सदस्य बन सकते है. मंदिर परिसर में विवाह, मुंडन, जनेऊ, पूजा व् अन्य मांगलिक कार्यो के लिए आप 11, 21, 51, 101 की शुल्क आदायगी कर वहा शुभ कार्य, गाड़ी पूजन आदि कर सकते है. 
मंदिर के भीतर इस बार रास्तो का पुनर्निर्माण किया गया है, पानी की नयी व्यवस्था की गयी है, भगवान् परशुराम की मूर्ति को शीसे के अन्दर ढँक दिया गया है. 
यज्ञं में प्रवचन करता विशेस आकर्षण करने में अक्षम दिखे. उनके पास ज्ञान तो था पर वाक् चपल नहीं थे. हा यज्ञं कुंड के चारो और फेरी देने वाले खूब दिखे, कोई 11 , कोई 21 , 51 तो कोई 101 . 
वैसे यज्ञं की सबसे बड़ी खासियत थी प्रेमी युवा जोड़ो के मिलने की एक शुकून भरी जगह. आवारगर्दी करने वालो के लिए 5  दिनों जन्नत नसीन जगह, अपने को रंगदार दिखने की चाहत रखने वालो के लिए लाठी ले कर कार्यकर्त्ता के रूप में यहाँ वहा दौड़ते रहने वालो के लिए खुबसूरत आशियाना, साथ ही धुल में सने समोसे, जलेबी भी खूब बीके. 
मनोरंजन के लिए लगाएगए झूलो का भी यज्ञं प्रेमियों ने खूब आनंद लिया.
यज्ञं के दौरान हवाओ में कई बाते भी होती रही. खासकर राजनेताओ को लेकर अनंत सिंह आये, किसी ने बताया नितीश कुमार आ रहे है तो कोई राजीव रंजन (ललन सिंह) की बात कर रहा है. 
वैसे ये यज्ञं समाज को जोड़ने, प्रेम, स्नेहका प्रचार , आपसी रंजिता को समाप्त करने और एक सफल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में समाप्त हुआ.

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