आज फिर मुझसे पूछती है बार बार
कितने दिनों से तुमने पूछा ही नहीं
मेरा हाल ?
अब तो याद भी नहीं
कब रूठी थी मैं
और कब मनाया था तुमने बार-बार ?
अरसा गुजर गया,
जब मिलती थी मैं
तो बाहें पसारे खड़े होते थे तुम हर बार।
बुझे मन से कहती है
नजदीकियों ने ही कर दिया है
हमारे प्यार को शायद बेराह।
पर वह जानती है
जितनी बार बेसलीका हुआ है प्यार
फिर से नया नवेला सा हो जाता है हमारा प्यार ...
कितने दिनों से तुमने पूछा ही नहीं
मेरा हाल ?
अब तो याद भी नहीं
कब रूठी थी मैं
और कब मनाया था तुमने बार-बार ?
अरसा गुजर गया,
जब मिलती थी मैं
तो बाहें पसारे खड़े होते थे तुम हर बार।
बुझे मन से कहती है
नजदीकियों ने ही कर दिया है
हमारे प्यार को शायद बेराह।
पर वह जानती है
जितनी बार बेसलीका हुआ है प्यार
फिर से नया नवेला सा हो जाता है हमारा प्यार ...
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