प्रिय तेरे सुन्दर सपनो की ये कोई तो अभिलाषा होगी
कोई तो राह दिखती होगी सपनो के बाद की सुन्दर भोर,
फिर क्या देखा और क्या पाया सपनो की दुनिया से बहार आ
किस राह पे चलने को सिखा तुने उन सपनो से बहार आ.
या फिर सपनो के ताजमहल को सपनो में ही तू जीता रहा
या फिर बहार आ उस दुनिया से तुने कर्मो की परिभाषा को जाना,
या बैठा राह ताकता किसी पथिक का तुने दिन पूरा गवा डाला
या स्वप्नलोक को सच मानता उसके किस्से को ही सुनाता रहा.
लेकिन मेरे बंधू, मेरे प्रिय मैंने तो बस इतना ही जाना है
सपनो की हसी रात से प्यारी सुबह की उजियारी होती है,
जीवन को कर्मो से जान जो जीता राह उसी की आसां होती है
पते है वो 'उम्मीदों के आसमान' को जग से जीत.
dil kush ho gaya
जवाब देंहटाएंbahut khubsurat
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